दिल्ली पुलिस ने साइबर क्राइम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अलग-अलग मामलों में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इन मामलों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम और नकली इन्वेस्टमेंट स्कीम के जरिए लाखों रुपए की ठगी की गई थी. जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को म्यूल बैंक अकाउंट्स और लेयर्ड ट्रांजैक्शन के जरिए अलग-अलग राज्यों में खपाया गया.
पुलिस के मुताबिक, पहला मामला एक भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक से जुड़ा है, जो दिल्ली आने के बाद साइबर ठगों के निशाने पर आ गई. 6 दिसंबर को महिला को एक इंटरनेशनल नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को सैन फ्रांसिस्को एम्बेसी का अधिकारी बताते हुए दावा किया कि अमेरिका में दोबारा एंट्री के लिए उसे नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट की जरूरत है.
जांच में पता चला कि इसके बाद महिला को दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर से जुड़े होने का दावा करने वाले लोगों से जोड़ा गया. पुलिस यूनिफॉर्म पहने ठगों ने उसे बार-बार वीडियो कॉल कर डराया. उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया. दबाव में आकर महिला ने बैंक अकाउंट में 30 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए. ये मामला सामने आने के बाद क्राइम ब्रांच में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई.
🚨 INTER STATE CELL | CRIME BRANCH, DELHI POLICE 🚨
🔴 Major Cyber Fraud Network Busted
👮♂️ 2 key accused arrested in 2 cases
💰 Money trail of CRORES unearthed across multiple States
📌 Fraud Techniques Exposed:
🔹 Digital Arrest scam
🔹 Fake WhatsApp investment groups
🔹 Bogus… pic.twitter.com/3VPNqVIiAd
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— Crime Branch Delhi Police (@CrimeBranchDP) December 29, 2025
पुलिस जांच के दौरान सामने आया कि ठगी की रकम पंजाब की एक पार्टनरशिप फर्म के अकाउंट में जमा की गई थी. वहां से पैसे को तुरंत कई अन्य अकाउंट्स में ट्रांसफर किया गया और फिर कुछ ही मिनटों में अलग-अलग राज्यों से निकाल लिया गया. ट्रांजैक्शन पैटर्न और बैंक डिटेल के आधार पर पुलिस ने मोहाली और चंडीगढ़ में छापेमारी कर दी.
इस कार्रवाई में वरुण नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जो उस पार्टनरशिप फर्म का पार्टनर था. वो फर्स्ट-लेयर बेनिफिशियरी अकाउंट का ऑथराइज्ड सिग्नेटरी था. तलाशी के दौरान पुलिस ने उसके पास से 38 ATM कार्ड, 51 चेक बुक, कई मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 2.45 लाख रुपए कैश और एक SUV जब्त किए हैं. दूसरा मामला दिल्ली के एक निवासी से जुड़ा है.
उसे एक फ्रॉड इन्वेस्टमेंट स्कीम के जरिए 31.45 लाख रुपए का चूना लगाया गया. पीड़ित को एक WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया, जहां ज्यादा रिटर्न का लालच देकर उसे एक नकली ट्रेडिंग एप्लीकेशन इंस्टॉल करने के लिए कहा गया. आरोपी उसे छह अलग-अलग बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने के लिए उकसाते रहे. पैसे ट्रांसफर होते ही WhatsApp ग्रुप गायब हो गया.
ट्रेडिंग ऐप ने काम करना बंद कर दिया. ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने पुलिस से संपर्क किया. शिकायत के आधार पर केस दर्ज हुआ और जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई. जांच में खुलासा हुआ कि ठगी की रकम को कई म्यूल बैंक अकाउंट्स के जरिए घुमाया गया ताकि पैसों का सोर्स छिपाया जा सके. पुलिस ने पंजाब और गुजरात में छापेमारी के दौरान एक आरोपी को गिरफ्तार किया.
गिरफ्तार आरोपी की पहचान गुजरात के सुरेंद्र नगर निवासी अर्जुन सिंह (39) के रूप में हुई है. पुलिस के मुताबिक, अर्जुन इस स्कीम में इस्तेमाल हो रहे म्यूल अकाउंट्स की पहली और दूसरी लेयर को मैनेज करता था. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े दो अन्य आरोपी फरार हैं. उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं. पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है.
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